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बदली जा
सकती है मौसम की चाल... |
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'बारिश
वक्त से
पहले ही हो रही है...'
'इस
बार खट्टे रहेंगे आम...'
'ठंड
के दिनों में ही पक रहे हैं आम...'
ऐसी दो-चार कुछ और खबरें
भी इस साल की शुरुआत में सुनने को मिलीं। |
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बंद हो 'रूदन' हिंदी के पिछड़े होने
का... |
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एक और
हिन्दी दिवस मना
लिया
गया।
हिन्दी भाषा से बेइन्तहा
'लगाव'
और
'भक्तिभाव'
रखने वाले लोगों ने
हिन्दी का गुणगान किया और उसे आगे बढ़ाने के लिए कसमें खाईं... |
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जारी है
इन्सान की कुदरत से लड़ाई... |
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समलैंगिकता
को वैध घोषित किए जाने पर शोर-शराबा तो होना ही था। सो हो रहा
है...लेकिन इसके पक्ष में या विपक्ष में बोलने से
पहले हमें इसे विशेष
संदर्भों में देखने की जरूरत है... |
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अब जरूरी हो गया है ऑनलाइन वोटिंग... |
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इंटरनेट यूजर्स में से ज्यादातर वोटर
अपने लैपटॉप को छोड़कर वातानुकूलित ड्रॉइंग रूम से निकलकर बूथ तक जाने की जहमत नहीं
उठाते... |
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देश से बाहर आईपीएल कराने के फायदे! |
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शुरू से ही विश्लेषकों में यह विचार
मंथन चल रहा था कि देश से बाहर मैच कराने से क्या नफा-नुकसान होंगे। लोगों ने
अपनी-अपनी राय दी! यहां एक बानगी... |
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जीते तो हम
‘भारत
के लोग’
ही हैं... |
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क्या नेता इस बात को समझकर जनता के
सामने अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगे या फिर किसी न किसी झूठ के सहारे सिर्फ
चुनावी वैतरणी पार करने की कोशिश करेंगे... |
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नया मीडियाभारती
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:
क्या है खास! |
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14 मार्च साल 2002 में लॉन्च होने के
बाद मीडियाभारती डॉट कॉम ने अपनी सात साल की यात्रा में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं... |