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ताज महल

नतालिया सैम

मै वक्त की दहलीज पर ठहरा हुआ पुल हूं,

कायम है मेरी शान, मैं ताज महल हूं,

भूला है न भुलाएगा मुझको जमाना,

जिंदा है मेरे दम से मुहब्बत का फसाना।

 

जो दिल मैं उतर जाए, रंगीन गजल हूं,

मैं अमन का पैगाम, मुहब्बत की निशानी,

वो हुस्न हूं ढलती नहीं जिसकी जवानी,

ये किसने कहा तुमसे मैं गुजरा हुआ कल हूं।

 

पत्थर की इमारत हूं मगर मोम का दिल है,

पूनम का हसीन चांद मेरे गाल का तिल है।

 

मुमताज का पाकीजा कंवल हूं,

कब मैंने कहा मुझको निगाहों में बसा लो

मुमकिन हो तो जहरीली हवाओं सो बचा लो

दो चाहने वालों की तमन्नाओं का फल हूं।

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