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अमर की तलाश, भाजपा में आस!

ऋषि दीक्षित

समाजवादी पार्टी से निकाले जाने के बाद अमर सिंह अपने चहेतों के साथ विभिन्न राजनीतिक दलों में अपनी संभावनाएं तलाश रहे हैं। हालांकि उन्होंने बहुजन समाज पार्टी में जाने से दो टूक इनकार कर दिया है फिर भी भविष्य का पता नहीं है कि ऊंट किस करवट बैठेगा। वह राजनीतिज्ञ ही क्या जो बोले वही करे अपनी जुबान से न फिरे। यहां तो सब उलटवासियां जायज हैं। लोकसभा के आम चुनावों के बाद ही बदलते राजनीतिक परिदृश्य को देखकर अमर सिंह ने समाजवादी पार्टी से तौबा करने का मन बना लिया था। लेकिन जड़ों में जमे अमर सिंह इतनी जल्दी पार्टी से बाहर भी नहीं आ सकते थे। धीरे-धीरे उन्होंने माहौल तैयार किया और अपनी योजना में कामयाब हो गए।

अमर सिंह की इस कामयाबी में सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव के उन परिजनों का भी खासा हाथ रहा है जिनकी सपा में अमर सिंह के रहते चल नहीं पा रही थी। अमर सिंह भी जानते हैं। मुस्लिम वोट खिसकने के बाद समाजवादी पार्टी का सूरज अस्ताचल की ओर है। उत्तर प्रदेश में मुस्लिमों के फिर से कांग्रेस में लौट आने और जनता में कांग्रेस की बढ़ती साख क्षेत्रीय पार्टियों को खत्म करने का संकेत दे चुकी है। इसकी शुरुआत भी समाजवादी पार्टी से देखी जा रही है।

उत्तर प्रदेश की जनता भी इन क्षेत्रीय दलों के शासन से तंग आ चुकी है। राहुल गांधी का जादू कांग्रेस को खोई हुई जमीन वापस दिलाने में सफल हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी भी मुद्दाविहीन है लेकन फिर भी ब़ड़ा विपक्षी दल है यही वजह है भारतीय जनता पार्टी में अमर सिंह की गोटियों ने काम शुरू कर दिया है। अमर सिंह के बड़े भाई सदी के महानायक बिग बी ने गुजरात में मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रस्ताव स्वीकार कर यह संकेत दे दिया है। भाजपा को भी स्वगीय प्रमोद महाजन के विकल्प को भरने की जरूरत है। इस विकल्प को भरने में अमर सिंह ही फिट बैठते हैं और वैसे भी भाजपा पूंजीपतियों की पार्टी है और अमर सिंह भी पूंजीपतियों की श्रेणी में आते हैं।

वक्त की नजाकत को भांपने में माहिर अमर सिंह अपनी परिस्थितियों के चलते इन दिनों सोनिया गांधी के गीत गा रहे हैं और प्रदेश विभाजन के मुद्दे पर मायावती का साथ देने की बातें कर रहे हैं। यह तय है कि अमर सिंह को यदि कांग्रेस में जगह नहीं मिलती है तो वह भाजपा में अपनी प्रतिभा का जादू बिखेरेंगे। इसकी शुरुआत बड़ी सोची-समझी रणनीति के तहत हो चुकी है। फिलहाल अमर सिंह लोकमंच के नाम पर विभिन्न राजनीतिक दलों में हाशिए पर पड़े नेताओं को इकट्ठा कर अपनी ताकत दिखा सकते हैं और फिर विधिवत भारतीय जनता पार्टी में जाने की घोषणा कर सकते हैं। ठाकुर बिरादरी को एकजुट करने के नाम पर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी उन्हें पूरा सहयोग दे रहे हैं। राजनाथ सिंह को भी अमर सिंह जैसे छोटे राजनीतिज्ञ भाई की लम्बे समय से जरूरत थी।

समाजवादी पार्टी और अमर सिंह के बीच आरोप-प्रत्यारोपों का दौर इसी तरह चलता रहा तो होली तक कई रंग खिल जाएंगे। इन रंगों में मुंबई के उन फिल्मी सितारों के चेहरे भी रंगे नजर आएंगे जो अमर सिंह के साथ हैं। स्वाभिमान की लड़ाई के चलते ही अमिताभ बच्चन ने बदलते राजनीतिक समीकरणों में गुजरात सरकार का राजदूत बनकर यह साबित कर दिया है उनमें अभी भी दम है। वह झुकने वालों में से नहीं हैं। कांग्रेस में राजनीति का शिकार हुए बिग बी को अब राजनीति भी अच्छी तरह आ गई है। अपना परिवार बिखरने के डर से बिग बी ने भी समाजवादी पार्टी से दूरियां बना ली हैं। वे यह भी जानते हैं कि जो मुकाम उन्हें अन्य राजनीतिक पार्टियों में मिल सकता है वह कांग्रेस में नहीं। गांधी परिवार से उनके रिश्ते चाहे कितने ही मधुर क्यों न हो जाएं उनका स्तर दोयम दर्जे का ही रहेगा।

लम्बे समय से राजनीति में मध्यस्थता निभा रहे अमर सिंह की काबलियत पर कोई भी अंगुली नहीं उठा सकता। सभी जानते हैं अमर सिंह पर जिम्मेदारी आने के बाद वह उसे पूरी तरह निभाते हैं चाहे उन्हें कोई भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े। उदाहरण के लिए समाजवादी पार्टी को देखा जा सकता है। अब वह राजनीति की नई पारी खेलने के लिए फिर से तैयार हैं।

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